Electoral Bonds चुनावी बॉन्ड क्या है क्यों इसकी चर्चा सुर्खियों मे है ?

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Electoral Bonds news :चुनावी बॉन्ड मामले की सुनवाई पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार द्वारा संचालित भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें राजनीतिक दलों को धन देने के लिए इसके चुनावी बांड खरीदने वाले व्यक्तियों और कंपनियों का विवरण साझा करने के लिए जून तक का समय मांगा गया था ।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि चुनावी बॉन्ड की जानकारी मंगलवार (12 मार्च) को चुनाव आयोग के साथ साझा की जानी चाहिए और पैनल को इसे 15 मार्च की शाम तक अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करना होगा । न्यायालय कहती है की  लोगों को यह जानने का अधिकार है कि किस कंपनी या व्यक्ति ने किस राजनीतिक दल को कितनी राशि का भुगतान किया है ।

पिछले महीने, सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय दिया जिसमें उसने चुनावी बॉन्ड प्रक्रिया को ‘असंवैधानिक’ बताते हुए रद्द कर दिया था ।  मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई चुनावी बॉन्ड योजना ने ‘गुमनाम’ राजनीतिक वित्त पोषण की अनुमति दी थी ।  एस. बी. आई. इस योजना के तहत अधिकृत वित्तीय संस्थान था। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ऋणदाता को 12 अप्रैल, 2019 से खरीदे गए चुनावी बॉन्ड का विवरण 6 मार्च तक चुनाव आयोग को प्रस्तुत करने के लिए कहा था  जिसे 13 मार्च तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी प्रकाशित करने के लिए कहा गया था। एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से  समय सीमा जून तक मगने के लिए कहा था लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनावी बॉन्ड मामले में समय बढ़ाने की एसबीआई की याचिका खारिज कर दी है ।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनावी बॉन्ड मामले में समय बढ़ाने की एसबीआई की याचिका खारिज किए जाने पर माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा, “हम इस तथ्य का स्वागत करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई की याचिका खारिज कर दी है। यह देश में राजनीतिक वित्त पोषण, विशेष रूप से चुनावी वित्त पोषण की पारदर्शिता के हित में है… “

Electoral Bonds

चुनावी बॉन्ड (Electoral Bonds ) क्या है ?


चुनावी बॉन्ड (Electoral Bonds) एक वित्तीय उपकरण है जो राजनीतिक दलों को चुनावी या राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए धनराशि प्राप्त करने का एक तरीका है। यह बॉन्ड क्रेडिट कंपनियों द्वारा जारी किए जाते हैं और चुनावी या राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए समर्थन या अनुदान की रूपरेखा को दिखाते हैं। लोग इन बॉन्डों को खरीदकर अपना समर्थन प्रकट करते हैं और राजनीतिक दलों को धनराशि प्राप्त करने में मदद करते हैं।

चुनाव बॉण्ड प्रणाली को वर्ष 2017 में एक वित्त विधेयक के माध्यम से पेश किया गया था. इसे वर्ष 2018 में लागू किया गया. वे दाता की गुमनामी बनाए रखते हुए पंजीकृत राजनीतिक दलों को दान दे सकते है। इस बॉन्ड को एसबीआई को जिम्मेदारी दी गई थी की वह चुनावी बॉन्ड से सकती है और खरदाने वाले का पूरी डीटेल एसबीआई के पास रहेगी लेकिन उसे हमेशा के लिए गुमनाम  रखा जाएगा । ऐसे मे लोगों का मानना है की एसबीआई तो सरकारी बैंक है तो सरकार को बॉन्ड खरेदने वाले की सारी जानकारी मिल जाती होगी ।

चुनावी बॉन्ड (Electoral Bonds) को प्राप्त करने की शर्ते

  • वे राजनीतिक पार्टिया जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत हुई है
  • जिन्होंने पिछले आम चुनाव में लोकसभा या विधानसभा के लिये डाले गए वोटों में से कम-से-कम 1% वोट हासिल किये हों

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