ISRO के नए वर्ष 2024 की नई शुरुआत ‘XPoSat’ लॉन्च के साथ, best अचीवेंट ऑफ़ इसरो

चंद्र यान 3और आदित्य L की सफलता के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) नए वर्ष की पहले दिन यानी 1 जनवरी को XPoSat (एक्स-रे पोलारिमीटर सैटेलाइट) के लॉन्च के साथ वर्ष 2024 की शुरुआत कर चुका है । यह भारत का पहला XPoSat है जिसका उद्देश्य तीव्र X -ray स्रोतों के ध्रुवीकरण की जांच करना और ब्लैक होल की रहस्यमय दुनिया का अध्ययन करना है।

एक्सपोसेट क्या है ?

एक्सपोसेट खगोलीय एक्स-रे स्रोतों की विभिन्न गतिशीलता का अध्ययन करने के लिए भारत का पहला समर्पित पोलारिमेट्री मिशन है। उपग्रह को ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) पर लॉन्च किया गया । 1 जनवरी को XPoSat (एक्स-रे पोलारिमीटर सैटेलाइट) के लॉन्च के साथ नए वर्ष की शुरुआत कर चुका है । इसका उद्देश्य ब्रह्माण्ड के विभिन्न भागों से आने वाली एक्स-रे का अध्ययन करना है। इससे पहले हम चंद्रयान और सौर अध्ययन के लिए वाहन लॉन्च कर चुके हैं

XPosat (एक्सपोसेट) का महत्व

  • ISRO के अनुसार , X-ray पोलारिमीटर सैटेलाइट या एक्सपीओ सैट का उद्देश्य अंतरिक्ष में तीव्र एक्स-रे स्रोतों (X-ray sourse) के ध्रुवीकरण की जांच करना है।
  • एक्सपेसेट आकाशीय स्रोतों से एक्स-रे उत्सर्जन के अंतरिक्ष-आधारित ध्रुवीकरण माप में अनुसंधान करने वाला अंतरिक्ष एजेंसी का पहला समर्पित वैज्ञानिक उपग्रह है।
  • एक्स-ray ध्रुवीकरण आकाशीय स्रोतों के विकिरण तंत्र और ज्यामिति की जांच के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में कार्य करता है।
XPoSat

एक्सपोसेट का विवरण( discription of XPosat satellite )

  • इस सैटेलाइट का वजन 469 किलोग्राम है । इस मिशन का जीवन लगभग पाँच वर्ष है। इसका उद्देश्य POLIX पेलोड द्वारा थॉमसन स्कैटरिंग के माध्यम से लगभग 50 संभावित ब्रह्मांडीय स्रोतों से निकलने वाले ऊर्जा बैंड 8-30keV में एक्स-रे के ध्रुवीकरण को मापना है।
  • XSPECT पेलोड द्वारा ऊर्जा बैंड 0.8-15keV में ब्रह्मांडीय एक्स-रे स्रोतों का दीर्घकालिक वर्णक्रमीय और अस्थायी अध्ययन करना। सामान्य ऊर्जा बैंड में क्रमशः POLIX और XSPECT पेलोड द्वारा ब्रह्मांडीय स्रोतों से एक्स-रे उत्सर्जन का ध्रुवीकरण और स्पेक्ट्रोस्कोपिक माप करना।

एक्सपोसेट को बनाने में खर्च cost

एक्सपोसेट (XPosat ) उपक्रम को बनाने में लगभग 250 मिलियन रुपये की लागत आई है । XPoSat उपग्रह का जीवनकाल पाँच वर्ष होने का अनुमान है।यह लॉन्च इसरो के लिए काफ़ी रिसर्च के बाद हुई है। इसरो से इसके पहले अगस्त में, इसका चंद्रमा मिशन (moon missions) चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र के पास पहुंचा था वह एक ऐसा क्षेत्र है जहां इसके पहले कोई नहीं पहुंचा था। यह इसरो और भारत के लिए बड़े गर्व की बात थी । कुछ दिनों बाद, सूर्य के लिए अपना पहला अवलोकन मिशन आदित्य-एल1 लॉन्च किया।

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