Ayodhya ram mandir जाने से पहले पढ़े अयोध्या नगरी का इतिहास

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Ayodhya ram mandir : अयोध्या नगरी हमारे भारत देश के एक प्रांतीय राज्य ( उत्तर प्रदेश) में सरयू नदी के किनारे स्थित एक शहर है। इसे अयोध्या मंडल का प्रशासनिक मुख्यालय भी कहा जाता है। अयोध्या को साकेत के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है, कि हमारे भारत देश के विद्वान वेत्ता भी इस नगरी में अपना निवास स्थान बनाया क्योंकि यह एक सुविख्यात पावन नगरी है। हमारे भारत देश के जैन ग्रंथों में वर्णित वेद्धा की भी जन्मस्थली यहां वर्णित की गई है।

कैसे हुई अयोध्या की उत्पत्ति

इसकी उत्पत्ति संस्कृत की क्रिया युद्ध से हुई है, जिसका शाब्दिक अर्थ है -” लड़ना” या “युद्ध करना” । दूसरे शब्दों में कहा जाए तो योद्धा शब्द का अर्थ है, लड़ा जाना। हमारे चारों वेदों में से एक वेद (अथर्वेद) द्वारा मानना है कि इसका प्रयोग देवी देवताओं के अजेय शहर को लक्ष्य बनाने के लिए निर्धारित करता है। वहीं पुराण में भी कहा गया है कि अयोध्या केवल नाम से ही नहीं विख्यात है ,बल्कि अपने किए गए प्रसिद्ध कार्यों के लिए प्रसिद्ध है अर्थात् दुश्मनों पर अविजेय से विजय प्राप्त करना है।

रामायण में अयोध्या नगरी को प्राचीन व युगीन कौशल साम्राज्य व युगीन साम्राज्य की राजधानी भी बताई गई है, इसलिए हम इसे अन्य नाम कौशल के नाम से भी जाना जाता है।

अयोध्या नगरी का वैदिक इतिहास

अयोध्या नगरी भारत देश का प्रख्यात धार्मिक स्थल माना जाता है। यहां पर अनेक पंडित विद्वान वेत्ता अपना पूरा जीवन व्यतीत करते है। हमारे हिंदू सनातन में भी संस्कृति, वेद वेदांग, और प्राचीन पुराण में मोक्ष की प्राप्ति से वंचित या प्राप्ति के सप्तपुरियो का भी वर्णन मिलता है। मोक्ष की प्राप्ति के सप्तपुरियो का वर्णन किया गया है जो निम्न हैं –

1. हरिद्वार

2. काशी

3.उज्जैन

4.द्वारका

5. मथुरा

6. कांचीपुरम

7.अयोध्या (Ayodhya ram mandir)

इन सातों पूरियों में से एक प्रख्यात पुरी अयोध्या नगरी है, जो विशाल क्षेत्रो में फैली हुई है। यहां पर भारत देश के अलग अलग क्षेत्र से लोग मोक्ष की प्राप्ति के लिए आते है।

अयोध्या नगरी भारत के प्राचीन नगरों में से एक पुराणिक व धार्मिक स्थल है। अयोध्या नगरी की स्थापना ब्रह्मा के पुत्र “मनु” द्वारा की गई थी। इस नगरी को कौशल जनपद की राजधानी भी कहा जाता है। अयोध्या नगर सरयू नदी के किनारे बसा एक सुप्रसिद्ध नगर है। भारत देश के उत्तर प्रदेश राज्य के तीन धार्मिक स्थल है, जो सप्तपुरियो में से एक है – अर्थात् सरल शब्दों में कहें तो –

(a) अयोध्या: यह सरयू नदी के किनारे स्थित है।

(b) वाराणसी: यह गंगा नदी के किनारे स्थित है।

(c) मथुरा: यह यमुना नदी के किनारे स्थित है।

प्राचीन काल में अयोध्या नगर में रघुकुल का वंश शासन करते थे। अर्थात् प्रभु श्री राम और उनके पिता राजा दशरथ जी। जब भी भारत देश के लोग हिन्दू धर्म की बात करते है, तो रघुकुल वंश का नाम प्रथम स्थान पर होता है। प्रभु श्री राम ने रघुकुल वंश में जन्म लिया ओर उन्होंने अपना पूरा जीवन इस कुल में व्यतीत कर दिया है। ओर हर आदेशो का पालन किया। अयोध्या नगर को प्रभु राम की जन्म भूमि और कर्म भूमि दोनो ही सम्मिलित की गई है।

Ayodhya ram mandir
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अयोध्या नगरी के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल

अयोध्या नगरी प्रभु राम जी की जन्म भूमि है, क्योंकि यहां पर सभी प्रकार के मंदिर का संबंध प्रभु श्री राम, सीता मैया, लक्ष्मण, और हनुमान जी ही प्रस्तुत किए गए है। इसके अलावा इनके भाइयों जैसे भरत जी व शत्रुघ्न जी का भी मंदिर स्थापित किया गया है। आइए प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलीय के बारे में आपको विस्तार से बताते है, जहा घूम सकते है।

(a) हनुमानगढ़ी

अयोध्या में रामजन्मभूमि से कुछ मीटर की दूरी पर श्री रामभक्त हनुमान जी का भी सुप्रसिद्ध विख्यात मंदिर स्थित है। इस मंदिर में कई सीढ़ियों को चढ़कर जाना होगा , तब जाकर आप दर्शन कर सकते है।

प्राचीन काल में इस मंदिर को एक टीले पर स्थापित किया गया था। प्राचीन वेद वेताओ का मानना था की हनुमान जी यहीं से अपने प्रभु श्री राम जी की रक्षा करते थे। हनुमान जी को यह आशीर्वाद मिला था की प्रभु श्री राम के द्वारा कि सबसे पहले हनुमान जी के ही दर्शन करे उसके बाद प्रभु श्री राम जी के दर्शन करे तभी दर्शन का पुण्य फल प्राप्त होगा।

(b)श्री रामजन्मभूमि मंदिर

यह मंदिर अयोध्या के मध्य स्थित है। इस सभी मंदिरों में से एक प्रसिद्द मंदिर है। इसी स्थान पर श्री राम, भरत, लक्ष्मण,शत्रुघ्न जी का जन्म हुआ है।

इस मंदिर में चारो भ्रताओ के बाल स्वरूप की मूर्तियां स्थापित की गई है। यहां पर वर्ष भर हर दिन कई विदेशी तथा भारत देश के लोगो की भीड़ लगी ही रहती है। कई श्रद्धालु साल में दो तीन बार यहां दर्शन करने के लिए आते है।

(c)राम की पौड़ी

यदि आप अयोध्या श्री राम जन्मभूमि के दर्शन करने जाते है, तो अपनी शुरुआत इस मंदिर से ही करे। यहां पर वर्ष भर सभी श्रद्धालु सरयू नदी में डुपकी लगाकर अपनी मनोकामना को मांगते है, ओर दर्शन करते हैं।

(d)कनक भवन

हनुमान गढ़ी से कुछ दूरी पर स्थित यह कनक भवन का प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर को कनक भवन इसलिए कहते है क्योंकि यहां पर सोने के मुकुट और आभूषण से सुसज्जित मंदिर है। इस मंदिर की स्थापना सन 1890 – 91 में हुई थीं।

(e)अयोध्या का प्रसिद्ध मणि पर्वत

प्राचीन मान्यता के अनुसार जब हनुमान जी संजीवनी बूटी का पहाड़ लेकर श्री लंका जा रहे थे, तब वहा उस पहाड़ का कुछ हिस्सा गिर गया था जिसके कारण इस मणि पर्वत का निर्माण हुआ था। यह स्थान अयोध्या से मात्र 5 से 6 km की दूरी पर स्थित है। इस स्थान को बौद्धिक धर्म के लिए भी पवित्र माना जाता है।

22 जनवरी को Ayodhya ram mandir का भव्य आयोजन

22 जनवरी 2024 को अयोध्या नगरी में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन होने जा रहा है। यह कार्यक्रम 15 जनवरी से शुरु होगा और 22 जनवरी को राम लला की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होगी। इस दिन को ऐतिहासिक पर्व के रुप में मनाया जाएगा। इस महोत्सव में पूरा देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग यहां आएंगे और उत्सव में समिल्लित होगे।

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FAQ (संभावित पूछे जाने वाले सवाल )

अयोध्या का असली नाम क्या है?

अयोध्या को साकेत के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है, कि हमारे भारत देश के विद्वान वेत्ता भी इस नगरी में अपना निवास स्थान बनाया क्योंकि यह एक सुविख्यात पावन नगरी है। हमारे भारत देश के जैन ग्रंथों में वर्णित वेद्धा की भी जन्मस्थली यहां वर्णित की गई है

अयोध्या में श्री राम की मूर्ति की ऊंचाई कितनी है?

अयोध्या में श्री राम की मूर्ति की ऊंचाई 823 फीट है । 22 जनवरी 2024 को अयोध्या नगरी में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन होने जा रहा है। 22 जनवरी को राम लला की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होगी


राम मंदिर कितने मंजिल का है?

राम मंदिर तीन मंजिल का है । मन्दिर में 392 खंभे और 44 द्वार होंगे। प्रभु श्रीराम का बालरूप (श्रीरामलला सरकार का विग्रह) मुख्य गर्भगृह में होगा, और श्रीराम दरबार पहले तल पर होगा।और

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